Parivar Niyojan Essay In Hindi

Family Planning in Hindi – परिवार नियोजन पर निबंध

Family Planning in Hindi – परिवार नियोजन पर निबंध : भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है| इस तेजी से बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने का एकमात्र तरीका परिवार नियोजन के माध्यम से है। स्थिति इतनी बुरी है कि माल्थस की भविष्यवाणियां, यदि आबादी को नियंत्रित करने का कोई कृत्रिम साधन अपनाया नहीं जाता है, तो प्रकृति मानव आबादी पर अपना खुद का शिकार करेगी, सच हो रही है। परिवार नियोजन हमारे देश के तेजी से विकास के लिए आदर्श समाधान है हमें यह चर्चा करने देता है कि यह कैसे मदद कर सकता है। आर्थिक पहलू परिवार नियोजन से परिवार के आर्थिक स्तर में वृद्धि होगी।

परिवार के पास स्वयं और उनके बच्चों पर खर्च करने के लिए अधिक पैसा होगा। इसका मतलब है कि बच्चों को बेहतर शिक्षित किया जाएगा और माताओं की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुंच होगी। माँ का स्वास्थ्य: अक्सर बच्चे के जन्म का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वह उत्तरोत्तर कमजोर होती है। और परिवार की भलाई के लिए उनका योगदान कम करता है। लंबे समय में यह स्वास्थ्य और परिवार और उसके बच्चों के विकास पर प्रभाव डालता है। उचित देखभाल का अभाव समाज के लिए इन बच्चों को अयोग्य बनाता है। बेरोजगारी में वृद्धि: तेजी से बढ़ती जनसंख्या देश के शैक्षणिक और प्रशिक्षण सुविधाओं पर बोझ डालती है। कक्षा में और बच्चे प्रत्येक बच्चे के लिए शिक्षक द्वारा कम ध्यान रखते हैं|

लंबे समय में अधिक से अधिक प्रशिक्षित युवा पुरुष और महिला बेरोजगारों की श्रेणी में शामिल हो जाते हैं इस तरह के युवा बाजार में उत्पन्न किसी भी प्रकार के रोजगार के लिए अयोग्य हैं। परिवार नियोजन के कई तरीके हैं गांधीजी द्वारा प्रस्तावित परिवार नियोजन की प्राकृतिक पद्धति वैवाहिक अधिकारों से कुल संयम थी। तब एक व्यक्ति कई गर्भनिरोधक विधियों का उपयोग कर सकता है जो चिकित्सकों द्वारा प्रस्तावित किया गया है। वे खुद को संचालित कर रहे हैं, कॉपर टी या पाश, ओरल गोलियां और कंडोम जैसे इन्फ्रा गर्भाशय के उपकरणों का उपयोग करते हैं। ह्यूवेई, हमारे परंपरागत बाध्य देश में, जैसा कि कोई भी नहीं कहा जा सकता है कि काफी सफलता मिली है। एक नर उत्तराधिकारी की इच्छा है कि लोगों ने कई बच्चों को जन्म दिया। गरीबी के कारण इसके अलावा कई गरीब लोग दो से अधिक बच्चों को जन्म देते हैं। उन्हें लगता है कि अधिक बच्चे काम करने और पैसे कमाने के लिए और अधिक हाथ का मतलब करेंगे।

व्यापक प्रसार गरीबी, शराब और प्रजनन प्रक्रिया के कारण लोगों के लिए मनोरंजन का एकमात्र माध्यम है। इन सभी कारकों का परिणाम जनसंख्या विस्फोट में होता है इन सभी बाधाओं के बावजूद, सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने परिवार नियोजन को लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने छोटे परिवार के लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए मीडिया, लोगों को संपर्क और शिक्षा के लिए लोगों का इस्तेमाल किया है लोगों को जागरूक बनाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के द्वारा सरकार ने हमारे देश में आबादी के विकास की जांच करने की मांग की है। लाल त्रिकोण की तरह प्रतीक, और “हम दो, हमारे दो” जैसे नारे हम सभी के लिए बहुत परिचित हो गए हैं|

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परिवार नियोजन : राष्ट्रीय आवश्यकता

Parivar Niyojan Rashtriya Avashyakta

निबंध नंबर :-01

परिवार नियोजन का अर्थ है-छोटा और संतुलित परिवार। कितनी भयावह है यह चेतावनी कि यादि हमारी जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो सन 2000 तक देश की आबादी सौ करोड़ से भी अधिक हो जाएगी। आज हम बढ़ती जनसंख्या के प्रभाव से जिस बुरी तरह आतंकित और पीडि़त हैं-ओह! अभी तो 80-90 करोड़ ही हैं, तब यह हालत है और जब सौ करोड़ या उससे अधिक हो जाएंगे , तब? तब तो शायद खाने-पीने के लिए तो लड़ाई-झगड़े हों ही, लोगों के रहने के लिए भी देश की धरती छोटी पड़ जाएगी। आदमी की संतान कीड़े-मकोड़ों जैसी इधर-उधर रेंगती फिरेगी। पेट ीारने के लिए लोग एक-दूसरे को मारकर खा जाएंगे। हां, यदि हमने बेतहाशा, सुपरफास्ट ट्रेन की या जेट की गति से भी तेज बढ़ रही जनसंख्या पर काबू नहीं पाया, उसकी दर बहुत बड़ी सीमा तक नहीं घटाई, तो अगले दस-पंद्रह सालों के बाद इस पवित्र धरती पर यही सब होने जा रहा है। बुद्धिमान और सृष्टि को सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य पश्ुाओं से भी गया-बीता जीवन जीने को विवश हो जाएगा, इसमें तनिक भी संदेह नहीं। क्या बुद्धिमान और प्रगतिशील स्वभाव वाला मनुष्य उस स्थिति में जीने को तैयार है? निश्चय ही कतई नहीं!

तनिक हिसाब लगाकर देखिए, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के मात्र इन चालीस-पचास वर्षों की जनसंख्या कहां से कहां जा पहुंची है? अविभाजित भारत की कुल जनसंख्या 33 करोड़ थी। देश का विभाजन हुआ। उस समय के दंगों में जो लाखों लोग मारे गए, उनको तो जाने दीजिए, भारत विभाजन के बाद दस करोड़ की आबादी पाकिस्तान में चली गई या रह गई। बाकी वर्तमान भारत की कुल आबादी बची छब्बीस करोड़ और यह छब्बीस करोड़ केवल 40-50 वर्षों में ही अस्सी-नब्बे करोड़  यानी की तीन गुणा तक अधिक हो चुकी है। है न चौंका देने वाली बात। जिस अनुपात से जनसंख्या बढ़ती गई, निश्च ही देश की धरती, आवश्यक उत्पादन, काम-धंधे और रोजगार के साधन तथा अवसर उससे आधे अनुपात से भी नहीं बढ़े हैं। बढ़ सकते भी नहीं ोि। तभी तो आज हमें हर स्तर पर अनैतिक बनकर अभाव-अभियोग की परिस्थितियों में जीने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों, विषमताओं और भावी विनाश से बचने का एक ही उपाय है-परिवार नियोजन, अर्थात जनसंख्या की अबाध वृद्धि को रोककर परिवारों को संतुलित या छोटा बनाना बहुत आवश्यक है। इसके बिना कोई चारा शेष नहीं बचा।

सभी जागरुक लोग मानते हैं कि बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाकर ही वर्तमान विषमताओं और आने वाली विपत्तियों से बचा जा सकता है। छोटा परिवार होने पर उसकी रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन आदि सभी प्रकार की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति उपलब्ध साधनों से सरलता के साथ की जा सकती है। सभी का उचित ध्यान रखा जा सकता है। आज जो अनेक प्रकार के तनावों में हम जी रहे हैं, घर-परिवार टूट रहे हैं, लोगों में विश्वास, प्रेम, भाईचारा, धीरज, सहनशीलता आदि नहीं रह गए, उसका कारण है कि अनेक तरह के अभाव और अभावों का कारण है उत्पादनों की तुलना में बढ़ती जनसंख्या। परिवार नियोजित करके ही हम इन सब प्रकार की अस्वाभाविक स्थितियों से बचकर सुखी जीवन जी सकने की संभावना कर सकते हैं।

परिवार नियोजन के लिए यद्यपि संयम, अनुशासन ओर आत्मनियंत्रण या ब्रह्चर्य-पालन से बउ़ा कोई उपाय नहीं, फिर भी आज अनेक प्रकार के कृत्रिम उपाय विज्ञान ने उपलब्ध कर दिए हैं। ऑपरेशन को भी सरल और श्रेष्ठ-सफल उपाय समझा जाता है। और कई साधन एंव उपकरण हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति परिवार को छोटा और संतुलित रख सकता है। विवाह की आयु बढ़ाना भी एक उपाय माना जाता है।, पर उतना कारगर नहीं कहा जा सकता। जो कोई उपाय किया जाए, ‘हम दो हमारे दो’ इसी सीमा तक परिवार का रहना सर्वश्रेष्ठ है। इससे अधिक अपने लिए विपत्तियों और तनावों को निमंत्रण देने के सिवा और कुछ भी नहीं है।

आज देश में नगर-गांव प्रत्येक स्तर पर परिवार-नियोजन या परिवार-संतुलन का राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अब अशिक्षित और देहाती लोग भी इसका महत्व समझने लगे हैं। सभी प्रकार के उपलब्ध साधन ओर उपाय भी अपनाए जा रहे हैं, फिर भी अपेक्षित परिणाम सामने क्यों नहीं आ पा रहे, विचारणीय मुद्दा है। कहा जा सकता है कि इस आंदोलन को और भी जोर-शोर से व्यापक बनाने की आवश्यकता है। इसकी राह में किसी भी प्रकार की कट्टर धार्मिकता को प्रभावी होने देना हठ और मूर्खता से अधिक कुछ नहीं। हमारे भले में राष्ट्र का भला है और राष्ट्र के अस्तित्व में हमारा अस्तित्व है। हमारी सूझ-बूझ और बुद्धिमता ही अपनी और राष्ट्र की रक्षा के इस कार्यक्रम को सफल बना सकती है। अत: सभी वर्गों, जातियों, धर्मों आदि के लोगों को इस कार्य को सफल बनाने के लिए समान स्तर पर जुट जाना चाहिए। तभी सफलता और फिर स्वाभाविक जीवन संभव हो सकता है।

 

निबंध नंबर :-02

परिवार नियोजन
Parivar Niyajan

परिवार नियोजन अर्थात् परिवार को नियंत्रित करने की प्रक्रिया तथा इसकी महत्ता को सभी देशों ने समझा है। इसका प्रारंभ अवश्य ही ब्रिटेन से हुआ परंतु इसके पश्चात् सभी यूरोपीय देशों में बृहत् पैमाने पर इसका प्रचार-प्रसार हुआ। भारत जैसे देश में तो परिवार नियोजन अनिवार्य होना चाहिए। इस संदर्भ में हमारी सरकार ने अनेक योजनाएँ चलाई हैं तथा इस दिशा में विशेष रूप से कार्य भी किया जा रहा है।

भारत की जनसंख्या बहुत त्रीव गति से बढ़ रही है। आज हम जनसंख्या के क्षेत्र में विश्व में चीन के पश्चात् दूसरे स्थान पर हैं। आज हम 100 करोड़ के आँकड़े को पार कर चुके हैं। यही कारण है कि इतने संसाधनों के होते हुए भी हमारी प्रगति की गति धीमी है। अतः परिवार नियोजन आज की आवश्यकता है। इस दिशा में यदि ठोस और सकारात्मक उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में स्थिति अत्यधिक विकराल हो सकती है।

भारत देश में परिवार नियोजन की महत्ता को स्वीकार करने तथा इसे लागू करने के अनेक कारण हैं-

1. आर्थिक कारण: बढ़ती हुई जनसंख्या का सीधा प्रभाव देश की आर्थिक दशा पर पड़ता है। अनेक परिवार विपन्नता की स्थिति मंे आ जाते हैं क्योंकि जनसंख्या वृद्धि के कारण उत्पन्न होने वाली प्रतिस्पर्धा में वे बहुत पीछे रह जाते हैं। अतः देश को समृद्ध बनाने के लिए परिवार नियोजन अत्यधिक आवश्यक है।

2. राष्ट्र की उन्नति: प्रमुखतः भारत जैसे विकासशील राष्ट्र की उन्नति के लिए परिवार नियोजन अनिवार्य है। तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण सरकार के लिए सभी नागरिकों को शिक्षा, घर व भोजन की सुविधा जुटा पाना एक दुष्करक कार्य हो गया है। अनेक संसाधनो के बावजूद विकास की गति में विराम-सा लग गया है।

3. स्त्री की शारीरिक व मानसिक दशा: प्रायः अधिक बच्चे पैदा करने से माताएँ अस्वस्थ व कुपोषण की शिकार हो जाती हैं। दुर्बल अवस्था में उत्पन्न बच्चे भी प्रायः कमजोर होते हैं। गर्भाव्यवस्था के दौरान आराम व भोजन न मिल पाने के कारण जच्चे और बच्चे दोनों की मौत होने का खतरा भी बना रहता है।

प्रिवार नियोजन के मार्ग में अनेक बाधाएँ हैं। देश की दो-तिहाई जनसंख्या आज भी गाँवों में निवास करती है। इनमें से अनेक परिवार निर्धन एंव अशिक्षित है। वे आज भी अंधविश्वासों व रूढ़िगत परंपराओं मंे जकड़े हुए हैं। इनके अनुसार बच्चे ईश्वर की देन हैं और उस पर नियंत्रण ईश्वर की इच्छा के विरूद्ध है। अनेक धार्मिक मान्यताएँ भी इसकी सार्थकता में बाधक बनी हुई हैं। अशिक्षित होने के कारण वे इसकी महत्ता को समझ नहीं पाते हैं। इन्ही कारणों से आज हमारी जनसंख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो रही है। दूसरी ओर भारत एक प्रजातांत्रिक देश होने के नाते अपने नागरिकों पर परिवार नियोजन के कार्यक्रमों को बलात् थोप नहीं सकता है।

परिवार नियोजन की दिशा में हमारी सरकार अपनी पूर्ण दक्षता से प्रयास कर रही है। इसके लिए देश के सभी भागों मे परिवार कलयाण केंद्र स्थापित किए गए हैं जिनके माध्यम से लोगों को परिवार कल्याण से संबंधित सभी जानकारियाँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अतिरिक्त उनमें निःशुल्क गर्भनिरोधक सामग्री वितरित की जाती है। दूरदर्शन, समाचार-पत्र, रेडियो तथा अन्य संचार माध्यमों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है।

आवश्यकता इस बात की है कि देश के सभी नागरिक परिवार नियोजन की महत्ता को समझें तथा इसे कारगर बनाने में सरकार को यथासंभव सहयोग दें। आज की स्थिति इतनी विस्फोटक है कि केवल सरकारी प्रयासों से लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है। परिवार नियोजन कार्यक्रमों की सफलता राष्ट्र की सफलता से जुड़ी हुई है अतः सभी स्तरों पर जागरूक होने की आवश्यकता है।

July 3, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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